लेसन 1 / 8 · मोटर इंश्योरेंस

मोटर पॉलिसी के प्रकार (TP, Comprehensive, OD, Add-ons)

भारत में मोटर कवर के तीन रूप — ज़रूरी third-party liability, standalone own damage और दोनों को जोड़ने वाली package पॉलिसी — साथ में owner-driver का personal accident कवर, compulsory deductible, third-party की लिमिट और add-ons से क्या बदलता है।

तथ्य-जाँच: 8 अक्टूबर 2026गेम में 7 प्रैक्टिस सवाल

दो जोखिम, दो sections

गाड़ी से दो अलग जोखिम बनते हैं। पहला, वह नुकसान जो गाड़ी दूसरे लोगों को पहुँचा सकती है (मौत, चोट या उनकी संपत्ति का नुकसान), जिसके लिए मालिक कानूनन ज़िम्मेदार ठहराया जा सकता है। दूसरा, खुद गाड़ी का खो जाना या उसे नुकसान होना।

Package पॉलिसी में Section I own damage है और Section II third party के प्रति liability है। इसलिए पैदल चलने वाले की मौत Section II का मामला है, own-damage क्लेम कभी नहीं।

कवर के तीन रूप

Third-party liability (TP) पॉलिसी में liability वाला section होता है, own-damage वाला नहीं। नीचे बताया गया owner-driver का personal accident कवर इसके साथ ज़रूरी है। यह कानून की कम से कम माँग है: Motor Vehicles Act, 1988 की section 146 के तहत सड़क पर चलने वाली हर मोटर गाड़ी के पास यह होना चाहिए।

Standalone own-damage (OD) पॉलिसी बीमित गाड़ी के खो जाने या उसके नुकसान को कवर करती है। यह किसी भी जनरल बीमा कंपनी से खरीदी जा सकती है, लेकिन तभी जब एक valid TP पॉलिसी चालू हो। दोनों अलग-अलग बीमा कंपनियों के पास हो सकती हैं। Comprehensive (package) पॉलिसी में दोनों sections साथ होते हैं।

Owner-driver के लिए personal accident कवर भी ज़रूरी है, कुछ सीमित छूट के साथ। Section II मालिक की अपनी चोटों के लिए कुछ नहीं करता।

आज के नियम

1 सितंबर 2018 से बिकी नई गाड़ियों के लिए long-term TP पॉलिसी ज़रूरी थी, कार के लिए तीन साल और दोपहिया के लिए पाँच साल की। यह Supreme Court के एक निर्देश के बाद हुआ, जिसे IRDAI ने लागू किया। अगस्त 2026 में Supreme Court ने निर्देश दिया कि ये अवधियाँ बढ़ाकर चार और छह साल की जाएँ। इसलिए आज खरीदी गई गाड़ी के लिए IRDAI की मौजूदा शर्त देख लें।

Section II में third party की मौत या शारीरिक चोट की liability पर रुपयों की कोई सीमा नहीं है। संपत्ति के नुकसान की लिमिट standard private-car पॉलिसी में ₹7.5 लाख और दोपहिया पॉलिसी में ₹1 लाख है। TP प्रीमियम की दरें Central Government, IRDAI से राय लेकर notify करती है।

Section I में पॉलिसीधारक हर own-damage क्लेम पर compulsory deductible खुद उठाता है: 1500 cc तक की private car के लिए ₹1,000 और उससे ऊपर ₹2,000। ये शर्तें India Motor Tariff से चली आ रही हैं। किसी खास जोखिम के लिए बीमा कंपनी इससे ज़्यादा रकम लगा सकती है।

Add-ons क्या करते हैं

Add-ons अतिरिक्त प्रीमियम पर own-damage कवर को बढ़ाते हैं। Zero Depreciation बदले गए पुर्ज़ों पर depreciation की कटौती हटा देता है। Return to Invoice total loss या चोरी पर invoice value देता है। Roadside Assistance गाड़ी रास्ते में फँस जाने पर मदद का इंतज़ाम करता है।

Engine Protect एक खास कमी भरता है। बाढ़ एक बीमित peril है, लेकिन standard पॉलिसी आम तौर पर engine के consequential नुकसान को बाहर रखती हैं, जैसे पानी में डूबी गाड़ी को start करने या चलाने से हुआ hydrostatic lock। यह add-on इसी को कवर करने के लिए बना है, बीमा कंपनी की wording के हिसाब से।

नियम एक नज़र में

ज़रूरी कवरThird-party liabilityMotor Vehicles Act, 1988, section 146
Long-term TP, नई गाड़ियाँ1 सितंबर 2018 से 3 साल (कार) और 5 साल (दोपहिया); 4 अगस्त 2026 को Supreme Court ने 4 और 6 साल का निर्देश दियालिखे जाने के समय अगस्त 2026 के निर्देश को IRDAI ने अभी लागू नहीं किया था, इसलिए मौजूदा शर्त देख लें
Third party की मौत या चोटरुपयों की कोई सीमा नहीं
Third party की संपत्ति का नुकसान₹7.5 लाख (private car); ₹1 लाख (दोपहिया)Standard पॉलिसी
Compulsory deductible, private car1500 cc तक ₹1,000; उससे ऊपर ₹2,000बीमा कंपनी ज़्यादा लगा सकती है
उदाहरण

एक फिसलन, तीन नुकसान

41 साल के अर्जुन नागपुर में package पॉलिसी के साथ 1200 cc की hatchback चलाते हैं। एक शाम गाड़ी फिसलती है। उनके अपने bonnet में dent पड़ता है, एक साइकिल सवार को चोट लगती है और खड़े हुए एक स्कूटर को नुकसान होता है।

Bonnet Section I का क्लेम है, जो आँके गए मरम्मत के खर्च में से ₹1,000 का compulsory deductible घटाकर चुकाया जाता है। साइकिल सवार की चोट और स्कूटर Section II के क्लेम हैं: चोट पर रुपयों की कोई सीमा नहीं, स्कूटर ₹7.5 लाख की संपत्ति वाली लिमिट के भीतर। सिर्फ़ TP वाली पॉलिसी होती, तब भी third party सुरक्षित रहते, लेकिन अर्जुन का bonnet नहीं।

हिसाब के साथ उदाहरण

जब संपत्ति का नुकसान लिमिट से ज़्यादा हो

  1. Standard पॉलिसी वाली एक private car एक showroom के सामने के हिस्से को नुकसान पहुँचाती है; मुआवज़ा ₹9,00,000 तय होता है।
  2. Third party की संपत्ति के नुकसान की पॉलिसी लिमिट: ₹7,50,000।
  3. लिमिट से ऊपर की रकम = ₹9,00,000 − ₹7,50,000 = ₹1,50,000।

नतीजा। बीमा कंपनी ₹7,50,000 के लिए ज़िम्मेदार है; बाकी ₹1,50,000 गाड़ी के मालिक पर रहते हैं। Third party की चोट में रुपयों की कोई सीमा नहीं होती।

मुख्य बातें

  • Third-party liability कवर Motor Vehicles Act, 1988 की section 146 के तहत ज़रूरी है; own-damage कवर को Act ज़रूरी नहीं करता।
  • Package पॉलिसी में Section I own damage है और Section II third party के प्रति liability।
  • Standalone OD पॉलिसी किसी भी जनरल बीमा कंपनी से मिल सकती है, बशर्ते एक valid TP पॉलिसी चालू हो।
  • Zero Depreciation, Engine Protect, Roadside Assistance और Return to Invoice जैसे add-ons own-damage कवर को बढ़ाते हैं, हर बीमा कंपनी की अपनी शर्तों पर।

आम ग़लतफ़हमियाँ

  • Comprehensive का मतलब यह नहीं कि सब कुछ चुकाया जाता है। Depreciation, deductible और exclusions फिर भी लागू रहते हैं।
  • नई गाड़ी की long-term TP पॉलिसी में own-damage कवर शामिल नहीं होता। उसके लिए Section I चाहिए, उसी पॉलिसी में या अलग पॉलिसी में।
  • बाढ़ का क्लेम अपने-आप engine का क्लेम नहीं बन जाता। पानी में डूबी गाड़ी को start करने या चलाने से हुआ engine का नुकसान आम तौर पर excluded है, जब तक Engine Protect add-on लागू न हो।

लोग अक्सर पूछते हैं

क्या कानून की बीमा वाली शर्त पूरी करने के लिए third-party पॉलिसी काफ़ी है?

Liability वाली शर्त के लिए हाँ: यह Motor Vehicles Act, 1988 की section 146 के तहत कानून की कम से कम माँग है, और owner-driver का personal accident कवर एक और शर्त है, कुछ सीमित छूट के साथ। लेकिन बीमित गाड़ी के नुकसान या चोरी पर यह कुछ नहीं देती।

क्या own-damage कवर किसी दूसरी बीमा कंपनी के पास हो सकता है?

हाँ, किसी भी जनरल बीमा कंपनी से, जब तक एक valid TP पॉलिसी चालू हो।

क्या compulsory deductible third-party क्लेम पर लगता है?

नहीं। पॉलिसीधारक इसे own-damage क्लेम पर उठाता है; third-party पीड़ितों को मुआवज़ा Section II के तहत मिलता है।

यह लेसन किन स्रोतों पर आधारित है

  • Motor Vehicles Act, 1988 — section 146 (ज़रूरी third-party इंश्योरेंस)
  • India Motor Tariff — standard package policy wording (Sections I और II, compulsory deductible, third-party संपत्ति के नुकसान की लिमिट), जैसी मौजूदा मोटर पॉलिसी में चली आई है
  • नई गाड़ियों की long-term third-party पॉलिसी पर IRDAI का निर्देश, 1 सितंबर 2018 से लागू, जो Supreme Court के एक निर्देश को लागू करता है
  • Long-term third-party पॉलिसी की अवधि पर Supreme Court का 4 अगस्त 2026 का निर्देश

इस लेसन के अंग्रेज़ी मूल को इन स्रोतों से मिलाकर स्वतंत्र रूप से जाँचा गया है (8 अक्टूबर 2026)। यह उसी का हिन्दी अनुवाद है, जिसे अंग्रेज़ी से मिलाकर अलग से जाँचा गया है। नियम बदलते रहते हैं: किसी भी आँकड़े पर भरोसा करने से पहले मौजूदा regulation, scheme document या policy wording देख लें। यह सिर्फ़ शिक्षा है, सलाह नहीं।

Trustner Group की ओर से मुफ़्त पढ़ाई। Trustner Academy, Trustner Group की एक शिक्षा पहल है। ग्रुप की कंपनियाँ insurance broking और निवेश सेवाओं में काम करती हैं, और इसके दफ़्तर बेंगलुरु, गुवाहाटी, कोलकाता, हैदराबाद और मुंबई में हैं। यहाँ की हर चीज़ सिर्फ़ सीखने के लिए है — यह कोई सलाह, सिफ़ारिश या किसी प्रोडक्ट का ऑफ़र नहीं है। दी गई स्थितियाँ सिर्फ़ उदाहरण के लिए हैं। नियम और आँकड़े बदलते रहते हैं; किसी भी बात पर अमल करने से पहले मौजूदा regulation, scheme document या policy wording ज़रूर देख लें।