लेसन 7 / 8 · हेल्थ इंश्योरेंस

हेल्थ इंश्योरेंस पर IRDAI के दिशानिर्देश

हेल्थ इंश्योरेंस पर IRDAI के आज के नियम — ये कहाँ लिखे हैं, पॉलिसी खरीदते समय, रिन्यूअल पर और क्लेम के समय क्या ज़रूरी करते हैं, क्या-क्या हर प्रोडक्ट पर छोड़ते हैं, और स्टैंडर्ड Arogya Sanjeevani पॉलिसी।

तथ्य-जाँच: 8 अक्टूबर 2026गेम में 7 प्रैक्टिस सवाल

नियम कहाँ लिखे हैं

हेल्थ इंश्योरेंस को Insurance Regulatory and Development Authority of India (IRDAI) रेगुलेट करता है। मौजूदा ढाँचा दो चीज़ों से बना है: IRDAI (Insurance Products) Regulations, 2024, जो 1 अप्रैल 2024 से लागू हैं, और 29 मई 2024 का Master Circular on Health Insurance Business। Master Circular ने पहले के सर्कुलर की जगह ली, जिनमें स्टैंडर्ड शर्तों पर 2020 का सर्कुलर भी शामिल है। और 2024 के regulations ने IRDAI (Health Insurance) Regulations, 2016 की जगह ली। जो सामग्री इन पुराने दस्तावेज़ों का हवाला देती है, वह पुरानी पड़ चुकी है।

पॉलिसी खरीदते समय

हर पॉलिसी के साथ एक Customer Information Sheet आनी ज़रूरी है, जिसमें उसकी मुख्य खूबियाँ, sub-limit, deductible और waiting period लिखे होते हैं। एक साल या उससे ज़्यादा अवधि की पॉलिसी में 30 दिन का free-look period होता है, जिसमें पॉलिसी लौटाई जा सकती है। बीमा कंपनियों को हर उम्र के लिए प्रोडक्ट देने होते हैं।

Pre-existing और तय बीमारियों के waiting period की सीमा 36 महीने है। AYUSH इलाज, यानी Ayurveda, Yoga and Naturopathy, Unani, Siddha और Homeopathy, को बीमा कंपनी की underwriting policy में इलाज के दूसरे तरीकों के बराबर दर्जा देना ज़रूरी है। इसके अलावा, Mental Healthcare Act, 2017 की section 21(4) कहती है कि हर बीमा कंपनी को मानसिक बीमारी का कवर उसी आधार पर देना होगा जिस आधार पर शारीरिक बीमारी का।

रिन्यूअल पर और क्लेम के समय

प्रीमियम भर दिया जाए तो हेल्थ पॉलिसी का रिन्यूअल करना ही होता है। बीमा कंपनी पिछले सालों में किए गए क्लेम की वजह से इनकार नहीं कर सकती। और जब तक sum insured न बढ़ाया जाए, वह नए सिरे से underwriting नहीं कर सकती। इसमें ये मामले शामिल नहीं हैं: साबित हुई धोखाधड़ी, जानकारी न बताना (non-disclosure) और गलत जानकारी देना (misrepresentation)। अगर कोई प्रोडक्ट वापस ले लिया जाए, तो बीमा कंपनी दूसरे प्रोडक्ट में migration का विकल्प देती है।

लगातार 60 महीने के कवर के बाद, जिसे moratorium कहते हैं, जानकारी न बताने (non-disclosure) के आधार पर क्लेम पर सवाल नहीं उठाया जा सकता, जब तक धोखाधड़ी साबित न हो। Cashless के अनुरोध पर एक घंटे के भीतर फ़ैसला करना होता है और डिस्चार्ज की अंतिम मंज़ूरी तीन घंटे के भीतर देनी होती है।

नियम क्या-क्या तय नहीं करते

नियम यह गारंटी नहीं देते कि हर क्लेम मंज़ूर होगा: हर क्लेम पॉलिसी की शर्तों के आधार पर परखा जाता है। नियम प्रोडक्ट की शर्तें भी तय नहीं करते, जैसे room rent की लिमिट, co-pay या bonus की दरें। ये हर पॉलिसी खुद तय करती है। इसी तरह, AYUSH को बराबर दर्जा मिलने से यह तय नहीं हो जाता कि कोई खास पॉलिसी किस चीज़ का पैसा देगी, या किन अस्पतालों में।

Arogya Sanjeevani

Arogya Sanjeevani एक स्टैंडर्ड indemnity हेल्थ प्रोडक्ट है, जो 2020 में शुरू किया गया और जिसकी शर्तें एक जैसी (common) हैं। अपनी स्टैंडर्ड शर्तों के तहत इसमें क्लेम पर 5% co-pay होता है, और बिना क्लेम वाले हर साल पर sum insured 5% बढ़ता है, ज़्यादा से ज़्यादा 50% तक। Room rent की लिमिट sum insured का 2% है, ज़्यादा से ज़्यादा रोज़ ₹5,000, और ICU के खर्च की लिमिट 5%, ज़्यादा से ज़्यादा रोज़ ₹10,000। इस समय जो शर्तें दी जा रही हैं, वे बीमा कंपनी के प्रोडक्ट दस्तावेज़ में देखी जा सकती हैं।

नियम एक नज़र में

PED और specific disease के waiting periodज़्यादा से ज़्यादा 36 महीने1 अप्रैल 2024 से लागू IRDAI के नियम; पहले 48 महीने
Moratoriumलगातार 60 महीनेIRDAI Master Circular on Health Insurance Business, 29 मई 2024; पहले 96 महीने
Free-look period30 दिन, एक साल या उससे ज़्यादा अवधि की पॉलिसी के लिएवही सर्कुलर
Cashless1 घंटे के भीतर फ़ैसला; डिस्चार्ज की मंज़ूरी 3 घंटे के भीतरवही सर्कुलर
रिन्यूअलपिछले क्लेम की वजह से इनकार नहीं; जब तक sum insured न बढ़ाया जाए, नए सिरे से underwriting नहींवही सर्कुलर; इसमें ये मामले शामिल नहीं हैं: साबित हुई धोखाधड़ी, जानकारी न बताना (non-disclosure) और गलत जानकारी देना (misrepresentation)
Customer Information Sheetहर पॉलिसी के साथवही सर्कुलर
उदाहरण

महँगे साल के बाद रिन्यूअल

उदाहरण: 58 साल की लक्ष्मी ने पिछले साल अपनी पॉलिसी पर दो बड़े क्लेम किए, और वे सोच रही हैं कि बीमा कंपनी उन्हें दोबारा लेगी या नहीं। जब तक धोखाधड़ी, जानकारी न बताना (non-disclosure) या गलत जानकारी देना (misrepresentation) साबित न हो, बीमा कंपनी को लेना ही होगा: प्रीमियम भरने पर पॉलिसी का रिन्यूअल होता है, पिछले क्लेम इनकार का आधार नहीं हैं, और उनकी नए सिरे से underwriting नहीं होती क्योंकि वे वही sum insured रख रही हैं।

हिसाब के साथ उदाहरण

Arogya Sanjeevani की स्टैंडर्ड शर्तें, आँकड़ों में

  1. मान लीजिए: ऊपर बताई गई स्टैंडर्ड शर्तों के तहत ₹5,00,000 का sum insured।
  2. Room rent: 2% × ₹5,00,000 = ₹10,000, लेकिन ऊपरी सीमा ₹5,000 है, इसलिए लिमिट रोज़ ₹5,000 है।
  3. ICU: 5% × ₹5,00,000 = ₹25,000, लेकिन ऊपरी सीमा ₹10,000 है, इसलिए लिमिट रोज़ ₹10,000 है।
  4. ₹1,00,000 के admissible (यानी पॉलिसी के हिसाब से बनने वाला) क्लेम पर co-pay: 5% × ₹1,00,000 = ₹5,000 पॉलिसीधारक उठाता है; बीमा कंपनी ₹95,000 चुकाती है।
  5. बिना क्लेम वाले तीन साल के बाद cumulative bonus, sum insured का 5% हर साल मानकर: 3 × ₹25,000 = ₹75,000, जिससे sum insured ₹5,75,000 हो जाता है। ज़्यादा से ज़्यादा bonus 50% × ₹5,00,000 = ₹2,50,000 है।

नतीजा। रोज़ की लिमिट ₹5,000 (कमरा) और ₹10,000 (ICU), ₹1,00,000 के क्लेम पर ₹5,000 का co-pay, और एक sum insured जो बढ़कर ज़्यादा से ज़्यादा ₹7,50,000 तक जा सकता है।

मुख्य बातें

  • मौजूदा ढाँचा IRDAI (Insurance Products) Regulations, 2024 और 29 मई 2024 का Master Circular on Health Insurance Business है।
  • खरीदने वालों को Customer Information Sheet मिलती है, और एक साल या उससे ज़्यादा की पॉलिसी में 30 दिन का free-look period।
  • पिछले क्लेम की वजह से रिन्यूअल से इनकार नहीं किया जा सकता।
  • IRDAI के नियम न हर क्लेम की मंज़ूरी का वादा करते हैं, न प्रोडक्ट की शर्तें तय करते हैं।

आम ग़लतफ़हमियाँ

  • IRDAI के नियमों का मतलब यह नहीं कि हर क्लेम चुकाया जाएगा। क्लेम को फिर भी पॉलिसी की शर्तों के आधार पर परखा जाता है।
  • Free-look period हर पॉलिसी में नहीं मिलता। यह वहाँ लागू होता है जहाँ पॉलिसी की अवधि एक साल या उससे ज़्यादा हो।
  • रिन्यूअल की यह सुरक्षा बिना शर्त नहीं है। साबित हुई धोखाधड़ी, जानकारी न बताना (non-disclosure) और गलत जानकारी देना (misrepresentation) इसमें शामिल नहीं हैं।

लोग अक्सर पूछते हैं

क्या बीमा कंपनी रिन्यूअल पर दोबारा underwriting कर सकती है?

नहीं, जब तक sum insured न बढ़ाया जा रहा हो।

क्या AYUSH को बराबर दर्जा मिलने का मतलब है कि हर AYUSH इलाज का पैसा मिलेगा?

नहीं। बीमा कंपनियों को अपनी underwriting policy में AYUSH को इलाज के दूसरे तरीकों के बराबर दर्जा देना होता है, लेकिन कोई खास पॉलिसी किस चीज़ का पैसा देगी, यह उसकी शर्तों पर निर्भर करता है।

अगर बीमा कंपनी कोई प्रोडक्ट वापस ले ले, तो क्या होता है?

बीमा कंपनी दूसरे प्रोडक्ट में migration का विकल्प देती है, और पूरे हो चुके waiting period जैसे credit पहले वाले कवर की हद तक साथ चलते हैं।

यह लेसन किन स्रोतों पर आधारित है

  • IRDAI (Insurance Products) Regulations, 2024
  • IRDAI Master Circular on Health Insurance Business (29 मई 2024)
  • Mental Healthcare Act, 2017 — section 21(4)
  • Arogya Sanjeevani — स्टैंडर्ड प्रोडक्ट की शर्तें, जैसी बीमा कंपनियों के प्रोडक्ट दस्तावेज़ों में छपी हैं

इस लेसन के अंग्रेज़ी मूल को इन स्रोतों से मिलाकर स्वतंत्र रूप से जाँचा गया है (8 अक्टूबर 2026)। यह उसी का हिन्दी अनुवाद है, जिसे अंग्रेज़ी से मिलाकर अलग से जाँचा गया है। नियम बदलते रहते हैं: किसी भी आँकड़े पर भरोसा करने से पहले मौजूदा regulation, scheme document या policy wording देख लें। यह सिर्फ़ शिक्षा है, सलाह नहीं।

Trustner Group की ओर से मुफ़्त पढ़ाई। Trustner Academy, Trustner Group की एक शिक्षा पहल है। ग्रुप की कंपनियाँ insurance broking और निवेश सेवाओं में काम करती हैं, और इसके दफ़्तर बेंगलुरु, गुवाहाटी, कोलकाता, हैदराबाद और मुंबई में हैं। यहाँ की हर चीज़ सिर्फ़ सीखने के लिए है — यह कोई सलाह, सिफ़ारिश या किसी प्रोडक्ट का ऑफ़र नहीं है। दी गई स्थितियाँ सिर्फ़ उदाहरण के लिए हैं। नियम और आँकड़े बदलते रहते हैं; किसी भी बात पर अमल करने से पहले मौजूदा regulation, scheme document या policy wording ज़रूर देख लें।