लेसन 1 / 4 · International Funds की बुनियाद

International Funds क्या हैं?

भारत में international fund एक SEBI-regulated mutual fund स्कीम है जो भारत के बाहर की securities में निवेश करती है। इस लेसन में बताया गया है कि ऐसी स्कीम विदेशी संपत्ति किन दो तरीकों से रखती है, निवेशक रुपये में लेन-देन कैसे करते हैं, और घरेलू स्कीम के मुकाबले इसमें क्या अलग तरह से चलता है।

तथ्य-जाँच: 8 अक्टूबर 2026गेम में 3 प्रैक्टिस सवाल

यह क्या है

International fund एक भारतीय mutual fund स्कीम है, जिसे SEBI regulate करता है, और जिसका पोर्टफ़ोलियो भारत के बाहर की securities में लगा होता है। यह कोई विदेशी प्रोडक्ट नहीं है: निवेशक के पास एक भारतीय स्कीम की यूनिट होती हैं, जो एक सामान्य mutual fund folio में रहती हैं।

रुपये को बदलने और विदेश में निवेश करने का काम स्कीम करती है, निवेशक नहीं। इसलिए निवेशक कोई remittance नहीं करता और उसे भारत के बाहर किसी खाते की ज़रूरत नहीं होती।

विदेशी संपत्ति रखने के दो तरीके

कुछ स्कीम विदेशी शेयर सीधे खरीदती हैं। बाकी fund-of-funds (FoFs) हैं: ये अलग-अलग securities खरीदने के बजाय एक या ज़्यादा विदेशी फंड या exchange-traded funds (ETFs) की यूनिट में निवेश करती हैं, जैसे वे जो S&P 500 या Nasdaq-100 जैसे किसी index को ट्रैक करते हैं।

FoF वाले ढाँचे में एक परत और जुड़ जाती है। निवेशक FoF के अपने खर्चे उठाता है, और इसके अलावा उस फंड के खर्चे भी जिसमें FoF निवेश करता है।

रुपये में निवेश, रुपये में वापसी

यूनिट रुपये में खरीदी और redeem की जाती हैं, और स्कीम रुपये में NAV जारी करती है। उस NAV में एक साथ दो बातें दिखती हैं: विदेशी बाज़ार की कीमतें, और वह exchange rate जिससे उन कीमतों को रुपये में बदला जाता है।

इसलिए रुपये में लेन-देन करने से currency risk खत्म नहीं होता। रुपया मज़बूत हो, तो रुपये वाली NAV घटती है; रुपया कमज़ोर हो, तो NAV बढ़ती है। विदेशी बाज़ार की कीमतें भी किसी भी दिशा में जा सकती हैं।

क्या अलग तरह से चलता है

ज़्यादातर mutual fund स्कीम अपनी NAV उसी दिन 11 PM तक बताती हैं। Fund-of-funds को, और उन स्कीम को जिनकी 80% या उससे ज़्यादा संपत्ति विदेश में है, अगले कारोबारी दिन 10 AM तक का समय मिलता है, इसलिए इनकी NAV देर से आती है। Redemption का पैसा आम तौर पर mutual fund स्कीम में 3 कामकाजी दिन के भीतर चुकाया जाता है, और 80% या उससे ज़्यादा विदेशी निवेश वाली स्कीम में 5 कामकाजी दिन के भीतर।

SEBI यह सीमा तय करता है कि mutual funds विदेश में कितना निवेश कर सकते हैं। जब ये लिमिट पूरी हो जाती हैं, तो स्कीम नए निवेश (fresh subscriptions) लेना बंद कर सकती है।

नियम एक नज़र में

NAV बताने का समय, ज़्यादातर स्कीमउसी दिन 11 PM तकSEBI Master Circular for Mutual Funds, 20 मार्च 2026
NAV बताने का समय, fund-of-funds और 80% या उससे ज़्यादा विदेशी निवेश वाली स्कीमअगले कारोबारी दिन 10 AM तकSEBI Master Circular for Mutual Funds, 20 मार्च 2026
Redemption का पैसा3 कामकाजी दिन के भीतर; 80% या उससे ज़्यादा विदेशी निवेश वाली स्कीम में 5 कामकाजी दिन के भीतरSEBI Master Circular for Mutual Funds, 20 मार्च 2026
विदेशी निवेश पर SEBI की लिमिटइंडस्ट्री के USD 7 billion के अंदर हर fund house के लिए USD 1 billion; overseas ETFs के लिए USD 1 billion के अंदर हर fund house के लिए USD 300 millionSEBI Master Circular for Mutual Funds, 20 मार्च 2026
उदाहरण

folio सामान्य, पोर्टफ़ोलियो विदेशी

रितु 29 साल की हैं और भोपाल में टीचर हैं। वे एक भारतीय mutual fund के overseas fund-of-funds में निवेश करती हैं। वे भारत के अपने बैंक खाते से रुपये में पैसा अपने mutual fund folio में जमा करती हैं, ठीक वैसे ही जैसे किसी घरेलू स्कीम में करतीं। वे विदेश में कोई remittance नहीं करतीं।

उन्हें दो फ़र्क दिखते हैं। सोमवार की NAV सोमवार की रात को नहीं आती; वह मंगलवार, यानी अगले कारोबारी दिन, 10 AM तक बताई जाती है। और स्कीम का expense ratio उनकी पूरी लागत नहीं है, क्योंकि जिस विदेशी फंड में स्कीम निवेश करती है उसके अपने खर्चे हैं। आगे चलकर उन्हें यह भी दिख सकता है कि स्कीम ने नए निवेश (fresh subscriptions) लेना बंद कर दिया है, अगर SEBI की विदेशी लिमिट पूरी हो गई हों।

मुख्य बातें

  • International fund एक SEBI-regulated mutual fund स्कीम है जो भारत के बाहर की securities में निवेश करती है।
  • यह विदेशी securities सीधे रख सकती है या, fund-of-funds के रूप में, विदेशी फंड या ETFs की यूनिट में निवेश कर सकती है।
  • निवेशक भारत में folio के ज़रिए रुपये में खरीदते और redeem करते हैं; रुपये वाली NAV में विदेशी कीमतें और exchange rate, दोनों दिखते हैं।
  • Fund-of-funds की और 80% या उससे ज़्यादा विदेशी निवेश वाली स्कीम की NAV अगले कारोबारी दिन 10 AM तक बताई जाती है।
  • ऐसी स्कीम में बाज़ार का जोखिम और दोनों दिशाओं में currency risk रहता है, और SEBI की विदेशी लिमिट पूरी हो जाने पर ये नए निवेश (fresh subscriptions) रोक सकती हैं।

आम ग़लतफ़हमियाँ

  • International fund विदेश में खरीदा गया कोई विदेशी प्रोडक्ट नहीं है। यह SEBI-regulated भारतीय mutual fund स्कीम है।
  • रुपये में पैसा देने से currency risk खत्म नहीं होता। रुपये वाली NAV विदेशी कीमतों के साथ-साथ exchange rate से भी बदलती है।
  • Fund-of-funds का expense ratio पूरी लागत नहीं है। Underlying फंड के खर्चे इसके अलावा उठाने होते हैं।
  • NAV का देर से आना fund house की ओर से देरी नहीं है। इन स्कीम को अगले कारोबारी दिन 10 AM तक का समय दिया गया है।

लोग अक्सर पूछते हैं

क्या S&P 500 जैसा index खुद एक फंड है?

नहीं। Index एक बास्केट है जिससे किसी बाज़ार को नापा जाता है। कोई विदेशी फंड या ETF उसे ट्रैक कर सकता है, और कोई भारतीय fund-of-funds उस फंड में निवेश कर सकता है।

क्या निवेशक को विदेश में पैसा भेजना पड़ता है?

नहीं। यूनिट भारत में folio के ज़रिए रुपये में खरीदी जाती हैं; पैसे को बदलने और विदेश में लगाने का काम स्कीम खुद करती है।

क्या स्कीम नया पैसा लेने से मना कर सकती है?

हाँ। SEBI की विदेशी निवेश लिमिट पूरी हो जाने पर वह नए निवेश (fresh subscriptions) लेना बंद कर सकती है।

यह लेसन किन स्रोतों पर आधारित है

  • SEBI Master Circular for Mutual Funds, 20 मार्च 2026 (NAV बताने का समय, redemption का भुगतान, विदेशी निवेश की लिमिट)
  • SEBI (Mutual Funds) Regulations, 2026

इस लेसन के अंग्रेज़ी मूल को इन स्रोतों से मिलाकर स्वतंत्र रूप से जाँचा गया है (8 अक्टूबर 2026)। यह उसी का हिन्दी अनुवाद है, जिसे अंग्रेज़ी से मिलाकर अलग से जाँचा गया है। नियम बदलते रहते हैं: किसी भी आँकड़े पर भरोसा करने से पहले मौजूदा regulation, scheme document या policy wording देख लें। यह सिर्फ़ शिक्षा है, सलाह नहीं।

Trustner Group की ओर से मुफ़्त पढ़ाई। Trustner Academy, Trustner Group की एक शिक्षा पहल है। ग्रुप की कंपनियाँ insurance broking और निवेश सेवाओं में काम करती हैं, और इसके दफ़्तर बेंगलुरु, गुवाहाटी, कोलकाता, हैदराबाद और मुंबई में हैं। यहाँ की हर चीज़ सिर्फ़ सीखने के लिए है — यह कोई सलाह, सिफ़ारिश या किसी प्रोडक्ट का ऑफ़र नहीं है। दी गई स्थितियाँ सिर्फ़ उदाहरण के लिए हैं। नियम और आँकड़े बदलते रहते हैं; किसी भी बात पर अमल करने से पहले मौजूदा regulation, scheme document या policy wording ज़रूर देख लें।