लेसन 8 / 8 · Mutual Funds पर टैक्स

Capital Gains और Losses का Set-off — व्यावहारिक उदाहरण

टैक्स कानून mutual fund यूनिट के capital loss को capital gains से set off करने देता है, और जो loss बच जाए उसे carry forward करने देता है। यह लेसन बताता है कि कौन सा loss किस gain से set off हो सकता है, आठ साल का carry-forward क्या है और उसके लिए return भरने की शर्त क्या है, अक्टूबर 2026 की स्थिति के अनुसार।

तथ्य-जाँच: 8 अक्टूबर 2026गेम में 4 प्रैक्टिस सवाल

Set-off का मतलब

जब यूनिट अपनी लागत से कम में बिकती हैं, तो नतीजा capital loss होता है। Gain की तरह loss भी short-term या long-term होता है, इस हिसाब से कि यूनिट कितने समय रखी गईं और वे फंड के किस group की हैं।

Set-off का मतलब है टैक्स निकालने से पहले loss को gain में से घटाना, ताकि टैक्स बची हुई (net) रकम पर लगे। कानून तय करता है कि कौन सा loss किस gain से set off हो सकता है। यह लेसन इन नियमों को उन बिक्रियों के लिए बताता है जो हो चुकी हैं; यह इस बात का plan नहीं है कि कब बेचना है।

कौन सा loss किस gain से set off होता है

Short-term capital loss में ज़्यादा गुंजाइश है: इसे short-term या long-term, दोनों capital gains से set off किया जा सकता है। Long-term capital loss को सिर्फ़ long-term capital gains से set off किया जा सकता है।

दोनों में से किसी को भी सैलरी या income के किसी दूसरे head से set off नहीं किया जा सकता। Capital loss capital gains के भीतर ही रहता है।

Loss को carry forward करना

जो loss उसी साल में खप न सके जिसमें वह बना, उसे उस साल के बाद आठ tax years तक carry forward किया जा सकता है और उन सालों के eligible capital gains से set off किया जा सकता है।

एक शर्त है: loss वाले साल का income-tax return उसकी due date को या उससे पहले भरना ज़रूरी है। Return देर से भरा जाए, तो loss उसी साल के gains से तो set off हो सकता है, पर carry forward नहीं होता।

Income-tax Act, 2025, जो 1 अप्रैल 2026 से लागू है, tax years में गिनता है, जहाँ पुरानी किताबों और नोट्स में assessment years लिखा मिलता है।

यह बाकी नियमों के साथ कैसे बैठता है

Equity-oriented यूनिट के long-term gains की साल की ₹1.25 लाख की लिमिट loss को set off करने के बाद लगाई जाती है: पहले loss gain को घटाता है, और लिमिट बची हुई रकम पर लगती है।

यूनिट first-in-first-out के हिसाब से बिकी मानी जाती हैं, इसलिए part-redemption को सबसे पहले खरीदी गई यूनिट से मिलाया जाता है। उन्हीं की तारीख और लागत से तय होता है कि बिक्री में gain हुआ या loss, और वह short-term है या long-term।

नियम एक नज़र में

Short-term capital lossShort-term या long-term capital gains से set offIncome-tax Act, 2025
Long-term capital lossसिर्फ़ long-term capital gains से set offIncome-tax Act, 2025
जो loss खप न सके, उसका carry-forwardआठ tax yearsIncome-tax Act, 2025; loss वाले साल का return उसकी due date तक भरा गया हो
Equity-oriented long-term gains की ₹1.25 लाख की लिमिटSet-off के बाद लगाई जाती हैIncome-tax Act, 2025, section 198 (पुराना Section 112A)
उदाहरण

Short-term loss और उसकी सीमाएँ (उदाहरण)

एक tax year में इमरान को एक hybrid fund की यूनिट पर ₹60,000 का short-term capital loss है और एक gold fund की यूनिट पर ₹50,000 का long-term capital gain। उन्हें सैलरी भी मिलती है।

Loss को long-term gain से set off किया जाता है। इससे gain कुछ नहीं बचता और ₹60,000 − ₹50,000 = ₹10,000 का loss बच जाता है। यह ₹10,000 उनकी सैलरी से set off नहीं हो सकता। अगर वे अपना return due date तक भरते हैं, तो यह आठ tax years तक carry forward होता है।

हिसाब के साथ उदाहरण

अगले साल में ले जाया गया long-term loss (उदाहरण)

  1. मान लीजिए (सिर्फ़ हिसाब समझाने के लिए); सब कुछ equity-oriented fund यूनिट से है, और अक्टूबर 2026 के नियम दोनों सालों में लागू माने गए हैं। Year 1 में एक निवेशक को ₹90,000 का long-term capital loss और ₹40,000 का short-term capital gain है।
  2. Year 1: long-term loss को short-term gain से set off नहीं किया जा सकता। Short-term gain पर टैक्स = ₹40,000 × 20% = ₹8,000, surcharge और cess से पहले।
  3. ₹90,000 का loss carry forward होता है, क्योंकि year 1 का return उसकी due date तक भरा गया था।
  4. Year 2: निवेशक को ₹2,50,000 का long-term capital gain है। Set-off के बाद: ₹2,50,000 − ₹90,000 = ₹1,60,000।
  5. साल की लिमिट के बाद: ₹1,60,000 − ₹1,25,000 = ₹35,000। टैक्स = ₹35,000 × 12.5% = ₹4,375, surcharge और cess से पहले।

नतीजा। Loss से year 1 में कोई राहत नहीं मिलती, पर यह year 2 का long-term gain घटाता है। इससे ₹35,000 taxable बचते हैं और टैक्स ₹4,375 बनता है।

मुख्य बातें

  • Short-term capital loss को short-term और long-term, दोनों capital gains से set off किया जा सकता है।
  • Long-term capital loss को सिर्फ़ long-term capital gains से set off किया जा सकता है।
  • Capital loss को सैलरी या income के दूसरे heads से set off नहीं किया जा सकता।
  • जो capital loss खप न सके, उसे आठ tax years तक carry forward किया जा सकता है, अगर loss वाले साल का return उसकी due date तक भरा गया हो।
  • Equity-oriented यूनिट के long-term gains की ₹1.25 लाख की लिमिट loss को set off करने के बाद लगाई जाती है।

आम ग़लतफ़हमियाँ

  • Long-term capital loss short-term gain को नहीं घटा सकता। इसे सिर्फ़ long-term capital gains से set off किया जा सकता है।
  • Loss अपने आप carry forward नहीं होता। Loss वाले साल का return उसकी due date तक भरना ज़रूरी है।
  • ₹1.25 लाख की लिमिट set-off से पहले नहीं घटाई जाती। पहले loss set off होते हैं और लिमिट बची हुई रकम पर लगती है।

लोग अक्सर पूछते हैं

क्या capital loss से सैलरी पर टैक्स घट सकता है?

नहीं। इसे सिर्फ़ capital gains से set off किया जा सकता है।

Return देर से भरा जाए, तो loss का क्या होता है?

वह उसी साल के capital gains से तो set off हो सकता है, पर carry forward नहीं होता।

Part-redemption में किन यूनिट से तय होता है कि loss हुआ या नहीं?

सबसे पहले खरीदी गई यूनिट से, क्योंकि यूनिट first-in-first-out के हिसाब से बिकी मानी जाती हैं।

यह लेसन किन स्रोतों पर आधारित है

  • Income-tax Act, 2025 — capital loss के set-off और carry-forward से जुड़े नियम; sections 196 और 198 (equity-oriented यूनिट पर दरें)
  • Financial year 2026-27 के fund-house tax reckoners (दरों के लिए secondary source)

इस लेसन के अंग्रेज़ी मूल को इन स्रोतों से मिलाकर स्वतंत्र रूप से जाँचा गया है (8 अक्टूबर 2026)। यह उसी का हिन्दी अनुवाद है, जिसे अंग्रेज़ी से मिलाकर अलग से जाँचा गया है। नियम बदलते रहते हैं: किसी भी आँकड़े पर भरोसा करने से पहले मौजूदा regulation, scheme document या policy wording देख लें। यह सिर्फ़ शिक्षा है, सलाह नहीं।

Trustner Group की ओर से मुफ़्त पढ़ाई। Trustner Academy, Trustner Group की एक शिक्षा पहल है। ग्रुप की कंपनियाँ insurance broking और निवेश सेवाओं में काम करती हैं, और इसके दफ़्तर बेंगलुरु, गुवाहाटी, कोलकाता, हैदराबाद और मुंबई में हैं। यहाँ की हर चीज़ सिर्फ़ सीखने के लिए है — यह कोई सलाह, सिफ़ारिश या किसी प्रोडक्ट का ऑफ़र नहीं है। दी गई स्थितियाँ सिर्फ़ उदाहरण के लिए हैं। नियम और आँकड़े बदलते रहते हैं; किसी भी बात पर अमल करने से पहले मौजूदा regulation, scheme document या policy wording ज़रूर देख लें।