Category I — Venture, Angel, SME, Social Impact, Infrastructure और Special Situation फंड
Category I में छह तरह के AIF आते हैं: venture capital, angel, SME, social impact, infrastructure और special situation फंड। यह लेसन बताता है कि Regulations इस category को कैसे बताते हैं, 2022 में क्या बदला, angel फंड के लिए खास नियम क्या हैं, और इस category की बाकी सीमाएँ और जोखिम क्या हैं।
Category I में क्या आता है
Category I AIF हैं: venture capital फंड, angel फंड, SME फंड, social impact फंड, infrastructure फंड और special situation फंड। नाम से पता चलता है कि कौन सा फंड कहाँ निवेश करता है: जैसे SME फंड छोटे और मझोले उद्यमों (small and medium enterprises) में, infrastructure फंड infrastructure में, और special situation फंड stressed assets में।
Regulations इस category को ऐसे फंड बताते हैं जिनका अर्थव्यवस्था पर अच्छा असर फैलता है (positive spillover effects), और जिनके लिए SEBI या सरकार प्रोत्साहन या रियायतों पर विचार कर सकती है। यह category का सिर्फ़ ब्योरा है। यह अपने आप कोई प्रोत्साहन या रियायत नहीं देता।
2022 के दो बदलाव
आज की सूची की दो बातें 2022 की हैं। 'Social venture फंड' का नाम बदलकर 'social impact फंड' कर दिया गया। इसलिए पुरानी सामग्री में उसी sub-category के लिए अब भी पुराना नाम मिल सकता है।
Special situation फंड उसी साल जोड़े गए। ये stressed assets में निवेश करते हैं और Category I की sub-category हैं, Category II की नहीं।
Angel फंड
Angel फंड में कौन निवेश कर सकता है, इस पर नियम ज़्यादा सख्त हैं। Angel फंड अब सिर्फ़ accredited investors से पैसा जुटा सकता है, यानी वे निवेशक जिनके पास SEBI की income या net worth की शर्तें पूरी करने के बाद accreditation का सर्टिफ़िकेट है। जो angel फंड 10 सितंबर 2025 को या उससे पहले रजिस्टर्ड हुए, उनके पास इस नियम का पालन करने के लिए 31 मार्च 2027 तक का समय है।
हर निवेश पर एक ऊपरी सीमा भी है। Angel फंड एक investee company में ज़्यादा से ज़्यादा ₹25 करोड़ लगा सकता है, और इस रकम में उसी कंपनी में किए गए follow-on निवेश भी गिने जाते हैं।
Category I के फंड के बाकी नियम
Category I के फंड close-ended होते हैं और उनकी tenure कम से कम तीन साल होती है। ये उधार नहीं ले सकते, सिवाय अस्थायी फंडिंग की ज़रूरतें पूरी करने के।
Angel फंड को छोड़कर Category I के बाकी फंड एक investee company में investable funds के 25% से ज़्यादा नहीं लगा सकते। और उनके sponsor या manager को फंड में corpus का 2.5% या ₹5 करोड़, जो भी कम हो, continuing interest के रूप में बनाए रखना होता है, ताकि फंड चलाने वालों का अपना पैसा भी निवेशकों के साथ जोखिम में रहे। ये दोनों नियम angel फंड पर लागू नहीं होते। Angel फंड की अपनी अलग सीमाएँ हैं: ऊपर बताई गई ₹25 करोड़ की ऊपरी सीमा उनमें से एक है, और बाकी यहाँ नहीं बताई गई हैं।
जोखिम असली हैं। जिन कारोबारों और प्रोजेक्ट में निवेश होता है वे नाकाम हो सकते हैं, close-ended फंड के यूनिट जब चाहें तब redeem नहीं किए जा सकते, unlisted निवेशों की कीमत आँकना मुश्किल होता है, और पूँजी डूब सकती है।
नियम एक नज़र में
Angel फंड की ऊपरी सीमा
यहाँ की रकमें सिर्फ़ हिसाब समझाने के लिए मानी हुई हैं। एक angel फंड ने एक नई कंपनी में ₹18 करोड़ लगाए हैं। बाद में कंपनी और पैसा जुटाती है, और फंड इस नए round में हिस्सा लेना चाहता है।
ऊपरी सीमा एक investee company में ₹25 करोड़ है, follow-on निवेश समेत। इसलिए फंड ज़्यादा से ज़्यादा ₹25 करोड़ − ₹18 करोड़ = ₹7 करोड़ और लगा सकता है। यह सीमा तय करती है कि एक कंपनी में कितना पैसा जा सकता है। इससे निवेश सुरक्षित नहीं हो जाता: कंपनी फिर भी नाकाम हो सकती है, और फंड के निवेशकों की पूँजी डूब सकती है।
मुख्य बातें
- Category I: venture capital, angel, SME, social impact, infrastructure और special situation फंड।
- Regulations इस category को ऐसे फंड बताते हैं जिनका अर्थव्यवस्था पर अच्छा असर फैलता है (positive spillover effects); यह ब्योरा अपने आप कोई प्रोत्साहन या रियायत नहीं देता।
- 2022 से 'social venture फंड' को 'social impact फंड' कहा जाता है, और special situation फंड Category I का हिस्सा हैं।
- Angel फंड सिर्फ़ accredited investors से पैसा जुटा सकते हैं और एक investee company में ज़्यादा से ज़्यादा ₹25 करोड़ लगा सकते हैं, follow-on निवेश समेत।
- Category I के फंड close-ended होते हैं और उनकी tenure कम से कम तीन साल होती है; जोखिमों में investee का नाकाम होना, illiquidity और पूँजी डूबना शामिल हैं।
आम ग़लतफ़हमियाँ
- Special situation फंड Category II नहीं हैं। ये stressed assets में निवेश करते हैं और Category I की sub-category हैं, जो 2022 में जोड़ी गई।
- 'Social venture फंड' कोई अलग sub-category नहीं है। 2022 से Regulations इन फंड को social impact फंड कहते हैं।
- 'Positive spillover' वाले ब्योरे के साथ अपने आप कोई फ़ायदा नहीं आता। SEBI या सरकार प्रोत्साहन या रियायतों पर विचार कर सकती है, लेकिन यह ब्योरा कोई रियायत नहीं देता।
- Angel फंड की ₹25 करोड़ की ऊपरी सीमा हर round के लिए अलग नहीं है। इसमें एक investee company में लगाई गई कुल रकम आती है, follow-on निवेश समेत।
लोग अक्सर पूछते हैं
Angel फंड किससे पैसा जुटा सकता है?
सिर्फ़ accredited investors से। जो angel फंड 10 सितंबर 2025 को या उससे पहले रजिस्टर्ड हुए, उनके पास इस नियम का पालन करने के लिए 31 मार्च 2027 तक का समय है।
Special situation फंड Category I AIF है या Category II?
Category I। Special situation फंड, जो stressed assets में निवेश करते हैं, 2022 में Category I में जोड़े गए। Private equity और real estate फंड Category II हैं।
क्या ₹1,000 का कम minimum सभी social impact फंड पर लागू है?
नहीं। Individual निवेशकों के लिए ₹1,000 का minimum सिर्फ़ उस social impact फंड पर लागू है जो केवल social stock exchange पर मौजूद non-profit organisations में निवेश करता है।
यह लेसन किन स्रोतों पर आधारित है
- SEBI (Alternative Investment Funds) Regulations, 2012 (14 जुलाई 2026 तक के संशोधनों के साथ)
- SEBI Master Circular for Alternative Investment Funds, 3 जून 2026 (7 सितंबर 2026 को अपडेट किया गया)
इस लेसन के अंग्रेज़ी मूल को इन स्रोतों से मिलाकर स्वतंत्र रूप से जाँचा गया है (8 अक्टूबर 2026)। यह उसी का हिन्दी अनुवाद है, जिसे अंग्रेज़ी से मिलाकर अलग से जाँचा गया है। नियम बदलते रहते हैं: किसी भी आँकड़े पर भरोसा करने से पहले मौजूदा regulation, scheme document या policy wording देख लें। यह सिर्फ़ शिक्षा है, सलाह नहीं।

