GIFT City और ग्लोबल निवेश · शुरुआती

GIFT City की बुनियाद

GIFT City का International Financial Services Centre क्या है, इसका नियामक (regulator) कौन है, एक निवासी (resident) वहाँ क्या-क्या ले सकता है, Liberalised Remittance Scheme के तहत पैसा वहाँ कैसे पहुँचता है, और उस आय पर भारत में टैक्स कैसे लगता है।

4 लेसनतथ्य-जाँच: 8 अक्टूबर 2026
  1. 01GIFT City (IFSC) क्या है?GIFT City में भारत का International Financial Services Centre (IFSC) है। इस लेसन में समझेंगे कि इसे कौन regulate करता है, वहाँ कारोबार विदेशी मुद्रा (foreign currency) में क्यों होता है, और निवासी (resident) का पैसा वहाँ RBI की Liberalised Remittance Scheme के तहत विदेश में remittance बनकर क्यों पहुँचता है।
  2. 02GIFT IFSC में क्या मिलता है — फंड, बैंक खाते और बीमाGIFT IFSC की संस्थाएँ तीन तरह के प्रोडक्ट देती हैं जो किसी निवासी (resident) के सामने आ सकते हैं: फंड स्कीम, विदेशी मुद्रा (foreign currency) के बैंक खाते और विदेशी मुद्रा का लाइफ इंश्योरेंस। इस लेसन में समझेंगे कि हर एक क्या है, तीनों में क्या एक जैसा है, और यह लेसन किन बातों को नहीं छूता।
  3. 03टैक्स और LRS का रास्ता — निवासी निवेशक पर क्या लागू होता हैयह लेसन दो बातों को अलग-अलग रखता है: GIFT IFSC में बनी यूनिट का tax holiday, और उस निवासी (resident) की टैक्स की स्थिति जो उस यूनिट के ज़रिए निवेश करता है। साथ में remittance की लिमिट और वहाँ भेजे गए पैसे पर लगने वाला tax collected at source भी बताया गया है।
  4. 04निवासी के रूप में GIFT IFSC का इस्तेमाल — Remittance, खाते और 180 दिन का नियमनिवासी व्यक्ति (resident individual) GIFT IFSC का इस्तेमाल असल में कैसे करता है: RBI की Liberalised Remittance Scheme के तहत remittance, IFSC banking unit में विदेशी मुद्रा खाता, उसके 180 दिन वाले दो नियम, और यह बात कि वहाँ DICGC का कवर नहीं है।

Trustner Group की ओर से मुफ़्त पढ़ाई। Trustner Academy, Trustner Group की एक शिक्षा पहल है। ग्रुप की कंपनियाँ insurance broking और निवेश सेवाओं में काम करती हैं, और इसके दफ़्तर बेंगलुरु, गुवाहाटी, कोलकाता, हैदराबाद और मुंबई में हैं। यहाँ की हर चीज़ सिर्फ़ सीखने के लिए है — यह कोई सलाह, सिफ़ारिश या किसी प्रोडक्ट का ऑफ़र नहीं है। दी गई स्थितियाँ सिर्फ़ उदाहरण के लिए हैं। नियम और आँकड़े बदलते रहते हैं; किसी भी बात पर अमल करने से पहले मौजूदा regulation, scheme document या policy wording ज़रूर देख लें।