लेसन 7 / 8 · Term Insurance

NRI के लिए Term Insurance

भारतीय बीमा कंपनी का term insurance एक non-resident Indian के लिए कैसे काम करता है: रहने वाले देश के हिसाब से underwriting, प्रीमियम कैसे भरे जाते हैं, विदेश में हुई मृत्यु के क्लेम में क्या-क्या लगता है, और प्रीमियम पर भारत में टैक्स कैसे लगता है।

तथ्य-जाँच: 8 अक्टूबर 2026गेम में 4 प्रैक्टिस सवाल

Non-resident के तौर पर खरीदना

Non-resident Indian (NRI) भारतीय लाइफ बीमा कंपनियों से term insurance खरीद सकते हैं। पॉलिसी आम तौर पर रुपये में होती है, इसलिए sum assured और प्रीमियम रुपये में तय होते हैं, NRI चाहे किसी भी करेंसी में कमाता हो। फ़ॉरेन एक्सचेंज वाला पहलू Foreign Exchange Management Act, 1999 और उसके regulations के हिसाब से चलता है।

प्रोडक्ट वही term कवर है जो कोई resident खरीदता है, उन्हीं IRDAI (Insurance Products) Regulations, 2024 के तहत, और उसी 30 दिन की free-look अवधि के साथ।

Underwriting

NRI की underwriting कैसे होगी, यह ज़्यादातर हर बीमा कंपनी का अपना चलन है, regulator का कोई फ़ॉर्मूला नहीं। बीमा कंपनियाँ रहने वाले देशों की अपनी सूचियाँ रखती हैं: कुछ देशों को वे standard शर्तों पर मंज़ूर करती हैं, कुछ को अतिरिक्त प्रीमियम पर, और कुछ को बिल्कुल नहीं। ये सूचियाँ हर बीमा कंपनी में अलग होती हैं, इसीलिए proposal फ़ॉर्म में रहने वाला देश पूछा जाता है।

कई बीमा कंपनियाँ चाहती हैं कि मेडिकल जाँच और proposal पर दस्तखत भारत में हों, जबकि कुछ विदेश में या tele-medical इंतज़ाम भी मान लेती हैं। बाद में किसी और देश में चले जाना तभी मायने रखता है जब policy wording उसे शर्त बनाती हो, इसलिए wording ही तय करती है।

प्रीमियम भरना

प्रीमियम आम तौर पर विदेश से बैंकिंग चैनल के ज़रिए inward remittance से भरे जाते हैं, या भारत में रखे NRE या NRO खाते से। हर बीमा कंपनी बताती है कि वह कौन से तरीके मानती है, और इसके लिए उसके proposal के दस्तावेज़ देखे जाते हैं। 22 सितंबर 2025 से individual लाइफ प्रीमियम पर GST नहीं लगता।

विदेश में हुई मृत्यु का क्लेम

क्लेम के नियम रहने की जगह के साथ नहीं बदलते: death क्लेम intimation के 15 दिन के भीतर settle करना होता है, या जहाँ जाँच की ज़रूरत हो वहाँ 45 दिन के भीतर, और Insurance Act, 1938 का section 45 वैसे ही लागू होता है जैसे किसी भी लाइफ पॉलिसी पर।

असल फ़र्क कागज़ों में है। विदेश में हुई मृत्यु के लिए बीमा कंपनियाँ आम तौर पर चाहती हैं कि विदेशी death certificate authenticate किया गया हो: जिस देश ने उसे जारी किया है, वहाँ की competent authority से apostille हो या, जहाँ apostille न मिलता हो, वहाँ के भारतीय दूतावास या consulate से attest हो। ठीक-ठीक क्या करना होगा, यह हर बीमा कंपनी में अलग होता है, इसलिए उसकी क्लेम checklist ही देखी जाती है।

भारत का इनकम टैक्स

जिस NRI की income भारत में taxable है और जो old tax regime में रहता है, वह Income-tax Act, 2025 के section 123 के तहत लाइफ प्रीमियम पर deduction ले सकता है; यह Act 1 अप्रैल 2026 से लागू है (1961 के Act का section 80C)। लिमिट Schedule XV की सारी चीज़ों को मिलाकर साल में ₹1,50,000 है, और 1 अप्रैल 2012 से जारी पॉलिसी में प्रीमियम sum assured के 10% के भीतर होना चाहिए। यह deduction सिर्फ़ भारत में taxable income में से ही घटाया जा सकता है और new regime में नहीं मिलता। रहने वाले देश का टैक्स एक अलग मामला है, जो उस देश के कानून के तहत आता है।

नियम एक नज़र में

फ़ॉरेन एक्सचेंज का ढाँचाForeign Exchange Management Act, 1999 और उसके तहत बने regulationsपॉलिसी के फ़ॉरेन एक्सचेंज वाले पहलू पर लागू
लाइफ प्रीमियम पर deduction₹1,50,000 के भीतर; 1 अप्रैल 2012 से जारी पॉलिसी में प्रीमियम sum assured के 10% के भीतर; सिर्फ़ old regimeIncome-tax Act, 2025, section 123 और Schedule XV (पुराना section 80C)
Death क्लेमIntimation से 15 दिन; जहाँ जाँच की ज़रूरत हो वहाँ 45 दिनIRDAI Master Circular on Protection of Policyholders' Interests, 5 सितंबर 2024
उदाहरण

वह क्लेम जो दूसरे देश से शुरू होता है

उदाहरण: विवेक एक NRI हैं। उनके पास एक भारतीय बीमा कंपनी की रुपये वाली term पॉलिसी है और वे प्रीमियम अपने NRE खाते से भरते हैं। जिस देश में वे काम करते हैं, वहीं उनकी मृत्यु हो जाती है। उनकी पत्नी, जो nominee हैं, भारत में बीमा कंपनी को क्लेम की intimation देती हैं।

आम क्लेम के कागज़ों के अलावा, बीमा कंपनी की checklist विदेशी death certificate माँगती है, जिस पर उस देश की competent authority का apostille हो। क्लेम की intimation हो जाने के बाद वही समय-सीमाएँ लागू होती हैं जो भारत में हुई मृत्यु पर: 15 दिन, या अगर बीमा कंपनी को जाँच करनी हो तो 45 दिन।

हिसाब के साथ उदाहरण

Section 123 की शर्तें जाँचना (रकमें सिर्फ़ उदाहरण के लिए)

  1. मान लीजिए (सिर्फ़ हिसाब समझाने के लिए): एक NRI की किराये की income भारत में taxable है और उसने old regime चुना है; term पॉलिसी, जो 1 अप्रैल 2012 के बाद जारी हुई है, का sum assured ₹2,00,00,000 और सालाना प्रीमियम ₹40,000 है; साल में Schedule XV की बाकी चीज़ों पर कुल ₹90,000 का दावा किया गया है।
  2. प्रीमियम का टेस्ट: sum assured का 10% = ₹2,00,00,000 का 10% = ₹20,00,000। ₹40,000 का प्रीमियम इसके भीतर है।
  3. Schedule XV की चीज़ों का कुल जोड़ = ₹40,000 + ₹90,000 = ₹1,30,000।
  4. Section 123 के तहत लिमिट = ₹1,50,000। ₹1,30,000 लिमिट के भीतर है, इसलिए पूरे ₹1,30,000 पर deduction मिलता है, जिसमें ₹40,000 का प्रीमियम भी शामिल है।

नतीजा। इन बातों पर ₹40,000 के प्रीमियम पर पूरा deduction मिलता है। New regime में, या भारत में कोई taxable income न हो, तो इस deduction का कोई असर नहीं होता।

मुख्य बातें

  • NRI भारतीय लाइफ बीमा कंपनियों से term insurance खरीद सकते हैं; पॉलिसी आम तौर पर रुपये में होती है।
  • हर बीमा कंपनी देश के हिसाब से underwriting के अपने नियम लगाती है, इसलिए मंज़ूरी और शर्तें हर बीमा कंपनी में अलग होती हैं।
  • प्रीमियम आम तौर पर inward remittance से या NRE या NRO खाते से भरे जाते हैं।
  • विदेश में हुई मृत्यु के लिए बीमा कंपनियाँ आम तौर पर apostille किया हुआ या दूतावास से attest किया हुआ विदेशी death certificate माँगती हैं।
  • Section 123 का deduction सिर्फ़ old regime में मिलता है, और सिर्फ़ भारत में taxable income में से घटाया जा सकता है।

आम ग़लतफ़हमियाँ

  • NRI की underwriting हर जगह एक जैसी नहीं है: हर बीमा कंपनी की मंज़ूर देशों की अपनी सूची और अपनी शर्तें हैं।
  • Section 123 का deduction हर NRI को नहीं मिलता: इसके लिए भारत में taxable income और old regime चाहिए।
  • Liberalised Remittance Scheme NRI के लिए नियम नहीं है। यह resident individuals पर लागू होती है।

लोग अक्सर पूछते हैं

भारतीय बीमा कंपनी से ली गई NRI की term पॉलिसी किस करेंसी में होती है?

आम तौर पर रुपये में। फ़ॉरेन एक्सचेंज वाले पहलू Foreign Exchange Management Act, 1999 और उसके regulations के हिसाब से चलते हैं।

Proposal फ़ॉर्म में रहने वाला देश क्यों पूछा जाता है?

क्योंकि बीमा कंपनियाँ देश के हिसाब से underwriting के अपने नियम लगाती हैं और तय करती हैं कि किन देशों को वे standard शर्तों पर, अतिरिक्त प्रीमियम पर या बिल्कुल नहीं मंज़ूर करेंगी।

क्या बाद में किसी और देश में चले जाने से पॉलिसी पर असर पड़ता है?

सिर्फ़ तब जब policy wording उसे शर्त बनाती हो, इसलिए संबंधित पॉलिसी की wording ही तय करती है।

यह लेसन किन स्रोतों पर आधारित है

  • Foreign Exchange Management Act, 1999
  • IRDAI (Insurance Products) Regulations, 2024 और IRDAI Master Circular on Life Insurance Products (12 जून 2024)
  • IRDAI Master Circular on Protection of Policyholders' Interests (5 सितंबर 2024) — क्लेम की समय-सीमाएँ
  • Income-tax Act, 2025 — section 123 और Schedule XV
  • Insurance Act, 1938 — section 45

इस लेसन के अंग्रेज़ी मूल को इन स्रोतों से मिलाकर स्वतंत्र रूप से जाँचा गया है (8 अक्टूबर 2026)। यह उसी का हिन्दी अनुवाद है, जिसे अंग्रेज़ी से मिलाकर अलग से जाँचा गया है। नियम बदलते रहते हैं: किसी भी आँकड़े पर भरोसा करने से पहले मौजूदा regulation, scheme document या policy wording देख लें। यह सिर्फ़ शिक्षा है, सलाह नहीं।

Trustner Group की ओर से मुफ़्त पढ़ाई। Trustner Academy, Trustner Group की एक शिक्षा पहल है। ग्रुप की कंपनियाँ insurance broking और निवेश सेवाओं में काम करती हैं, और इसके दफ़्तर बेंगलुरु, गुवाहाटी, कोलकाता, हैदराबाद और मुंबई में हैं। यहाँ की हर चीज़ सिर्फ़ सीखने के लिए है — यह कोई सलाह, सिफ़ारिश या किसी प्रोडक्ट का ऑफ़र नहीं है। दी गई स्थितियाँ सिर्फ़ उदाहरण के लिए हैं। नियम और आँकड़े बदलते रहते हैं; किसी भी बात पर अमल करने से पहले मौजूदा regulation, scheme document या policy wording ज़रूर देख लें।