Category Label और Benchmark
हर स्कीम के साथ SEBI के categorisation का एक category label होता है और एक benchmark जिससे उसकी तुलना की जाती है। यह लेसन बताता है कि label क्या तय करता है, कंपनी का आकार कैसे तय होता है, और Tier 1, Tier 2 और Total Return Index benchmarks कैसे काम करते हैं।
Category label क्या तय करता है
SEBI का categorisation स्कीम को तय categories में बाँटता है, ताकि हर fund house में एक label का एक ही मतलब हो। 26 फरवरी 2026 के सर्कुलर के बाद से 40 categories हैं: 13 equity, 17 debt, 7 hybrid, 1 life-cycle और 2 other। स्कीम का नाम उसकी category से मेल खाना ज़रूरी है।
Label बताता है कि स्कीम को मुख्य रूप से किस तरह की securities रखनी हैं। जैसे, Large Cap Fund को कम से कम 80% large-cap कंपनियों में रखना होता है। Label यह नहीं बताता कि स्कीम का performance कैसा रहेगा, और एक ही label वाली दो स्कीम अलग-अलग securities रख सकती हैं।
कंपनी का आकार कैसे तय होता है
Large Cap Fund और Mid Cap Fund जैसे label एक ही सूची पर टिके हैं, जो कंपनियों को market capitalisation के हिसाब से क्रम देती है। सबसे बड़ी 100 कंपनियाँ large cap हैं, 101 से 250 क्रम वाली mid cap हैं, और 251 से आगे वाली small cap हैं।
Association of Mutual Funds in India (AMFI) यह सूची हर छह महीने में निकालता है, जून के आखिर और दिसंबर के आखिर के डेटा से। हर fund house एक ही सूची इस्तेमाल करता है, इसलिए किसी कंपनी को हर जगह एक ही तरह से रखा जाता है। एक सूची से अगली सूची में कंपनी का क्रम बदल सकता है, और उसके साथ उसकी class भी बदल जाती है।
Benchmark एक पैमाने के तौर पर
Benchmark वह index है जिससे स्कीम के performance की तुलना की जाती है। हर स्कीम का एक Tier 1 benchmark होता है जो उसकी category को दिखाता है। Fund house एक Tier 2 benchmark भी जोड़ सकता है, जो स्कीम की अपनी निवेश style को दिखाता है; यह optional है।
Performance की तुलना benchmark के Total Return Index (TRI) रूप से की जाती है, जो 1 फरवरी 2018 से ज़रूरी है। Price index सिर्फ़ shares की कीमतों के बदलाव को देखता है। Total Return Index उन dividends को भी गिनता है जो index की कंपनियाँ चुकाती हैं, इसलिए यह ज़्यादा पूरा पैमाना है।
Benchmark सिर्फ़ तुलना के लिए है। इससे स्कीम का NAV या उसका riskometer स्तर तय नहीं होता, और स्कीम अपने benchmark से बेहतर करे या नहीं, उसकी वैल्यू घट सकती है।
नियम एक नज़र में
Price index और Total Return Index (उदाहरण के आँकड़े)
मान लीजिए कि एक साल में एक price index 8% बढ़ता है, और उसकी कंपनियाँ index के करीब 1.5% के बराबर dividends चुकाती हैं। उसी अवधि में Total Return Index मोटे तौर पर 9.5% बढ़ता है, क्योंकि वह उन dividends को गिनता है।
जिस स्कीम ने उस साल 9% रिटर्न दिया, उसने price index से बेहतर किया और Total Return Index से खराब। स्कीम को खुद अपने पास रखे shares पर dividends मिलते हैं, इसलिए Total Return Index ही बराबर की चीज़ों की तुलना है, और नियम इसी को ज़रूरी बताते हैं।
मुख्य बातें
- SEBI के 2026 के categorisation में 40 categories हैं, और स्कीम का नाम उसकी category से मेल खाना ज़रूरी है।
- Label बताता है कि स्कीम को मुख्य रूप से क्या रखना है, यह नहीं कि उसका performance कैसा रहेगा।
- Market capitalisation के हिसाब से large cap क्रम 1 से 100 है, mid cap 101 से 250, small cap 251 से आगे; AMFI यह सूची हर छह महीने में अपडेट करता है।
- हर स्कीम का एक Tier 1 benchmark होता है जो उसकी category को दिखाता है; उसकी style को दिखाने वाला Tier 2 benchmark optional है।
- Performance की तुलना benchmark के Total Return Index से की जाती है, जो कीमत के बदलाव के साथ dividends भी गिनता है।
आम ग़लतफ़हमियाँ
- Category label performance के बारे में कोई बात नहीं कहता। यह तय करता है कि स्कीम को मुख्य रूप से क्या रखना है।
- एक ही label वाली दो स्कीम का पोर्टफोलियो एक नहीं होता। वे अलग-अलग securities रख सकती हैं, और दोनों की वैल्यू घट सकती है।
- Tier 2 benchmark ज़रूरी नहीं है। हर स्कीम के लिए सिर्फ़ Tier 1 benchmark ज़रूरी है।
लोग अक्सर पूछते हैं
यह कौन तय करता है कि कोई कंपनी large cap, mid cap या small cap है?
यह बँटवारा AMFI की हर छह महीने में निकलने वाली सूची से होता है, जो कंपनियों को market capitalisation के हिसाब से क्रम देती है। Fund houses अपनी अलग सूचियाँ नहीं बनाते।
Price index की जगह Total Return Index क्यों इस्तेमाल होता है?
क्योंकि यह index की कंपनियों के चुकाए dividends भी गिनता है। Price index उन्हें छोड़ देता है, और इसलिए index ने जो दिया उसे कम दिखाता है।
क्या benchmark का स्कीम के NAV पर असर पड़ता है?
नहीं। यह performance की तुलना का पैमाना है। NAV स्कीम के अपने पोर्टफोलियो पर निर्भर करता है।
यह लेसन किन स्रोतों पर आधारित है
- SEBI Master Circular for Mutual Funds, 20 मार्च 2026 (Chapter 3, 26 फरवरी 2026 के सर्कुलर से categorisation; benchmarks)
- Market capitalisation के हिसाब से क्रम दी गई कंपनियों की AMFI की छमाही सूची
इस लेसन के अंग्रेज़ी मूल को इन स्रोतों से मिलाकर स्वतंत्र रूप से जाँचा गया है (8 अक्टूबर 2026)। यह उसी का हिन्दी अनुवाद है, जिसे अंग्रेज़ी से मिलाकर अलग से जाँचा गया है। नियम बदलते रहते हैं: किसी भी आँकड़े पर भरोसा करने से पहले मौजूदा regulation, scheme document या policy wording देख लें। यह सिर्फ़ शिक्षा है, सलाह नहीं।

