PMS, Mutual Fund, SIF और AIF — बनावट में फ़र्क
Mutual funds, Specialized Investment Funds (SIFs), PMS और Alternative Investment Funds (AIFs), सभी को SEBI regulate करता है, लेकिन इनका ढाँचा अलग-अलग है। यह lesson इन्हें चार बातों पर साथ-साथ रखकर देखता है: ढाँचा, कम से कम निवेश, ये कैसे पेश किए जाते हैं और निवेशक पर टैक्स कैसे लगता है।
Pooled फंड या अलग खाता
इनमें से किसी भी प्रोडक्ट के बारे में पहला सवाल यह है कि निवेशक के हाथ में असल में क्या है। Mutual fund स्कीम में और SIF में निवेशकों का पैसा pool किया जाता है और हर निवेशक के पास यूनिट होती हैं। SIF कोई अलग तरह की संस्था नहीं है: यह mutual fund framework के भीतर की एक प्रोडक्ट category है, जिसे mutual fund पेश करता है।
PMS बिलकुल अलग किस्म की चीज़ है। हर client का उसके अपने नाम पर एक अलग खाता होता है और उसमें रखी securities का सीधा मालिक वही होता है। दूसरे clients के साथ कुछ भी pool नहीं होता।
AIF फिर से एक pooled फंड है जिसमें निवेशकों के पास यूनिट होती हैं, लेकिन यह privately placed होता है। हर AIF तीन categories में से किसी एक में आता है: Category I, II या III।
कम से कम निवेश
SIF में हर निवेशक के लिए ₹10 लाख चाहिए। PMS में हर client के लिए ₹50 लाख चाहिए, जो funds या securities के रूप में लाए जा सकते हैं। AIF की सामान्य कम से कम रकम हर निवेशक के लिए ₹1 करोड़ है; AIF के या उसके manager के कर्मचारी और directors ₹25 लाख से निवेश कर सकते हैं। AIFs के लिए ₹5 करोड़ की कोई कम से कम रकम नहीं है।
Accredited investors, जो SEBI के income या net worth के पैमाने पूरे करते हैं, उन्हें SIF, PMS और AIF की कम से कम रकम से छूट है। ये सारी रकमें regulation से तय की गई शुरुआती सीमाएँ हैं। इनसे यह तय नहीं होता कि कौन-सा प्रोडक्ट जोखिम या quality में दूसरे से ऊपर या नीचे है।
हर एक कैसे पेश किया जाता है
Mutual fund स्कीम आम लोगों (public) के लिए पेश की जाती है। AIF सिर्फ़ private placement से पैसा जुटा सकता है, एक दस्तावेज़ के ज़रिए जिसे placement memorandum कहते हैं। PMS हर client और portfolio manager के बीच हुए agreement पर टिका होता है, जिसमें service और फ़ीस लिखी होती हैं।
टैक्स की स्थिति कैसे अलग है
टैक्स ढाँचे से तय होता है। Mutual fund या SIF के निवेशक के पास यूनिट होती हैं, और capital gain तब बनता है जब यूनिट redeem की जाती हैं। PMS client securities का मालिक होता है, इसलिए खाते की हर बिक्री client का अपना लेन-देन है और उस पर टैक्स client के हाथ में लगता है।
Category I और II AIFs को business income के अलावा बाकी income के लिए pass-through status मिला है: उस पर टैक्स निवेशक के हाथ में लगता है, जैसे निवेशक ने वह निवेश सीधे किया हो। Business income पर टैक्स फंड के स्तर पर लगता है। Category III AIFs को pass-through नहीं मिलता, इसलिए उनकी income पर टैक्स फंड के स्तर पर लगता है। यह स्थिति अक्टूबर 2026 के अनुसार है।
इनमें क्या एक जैसा है
इनमें से कोई भी ढाँचा रिटर्न की गारंटी नहीं देता, और सभी में बाज़ार का जोखिम है। PMS पोर्टफोलियो concentrated भी हो सकता है। AIF की यूनिट आम तौर पर illiquid होती हैं और लगाई हुई रकम (capital) डूब सकती है। और Category III AIF leverage इस्तेमाल कर सकता है, जिससे नुकसान कई गुना बढ़ सकता है।
नियम एक नज़र में
तीन निवेशक, तीन तरह की होल्डिंग
कविता एक mutual fund स्कीम में निवेश करती हैं: उनके पास एक pooled स्कीम की यूनिट हैं, और जब वे उन्हें redeem करती हैं तब उनके लिए capital gain बनता है। उनके भाई रोहन ₹50 लाख से PMS खाता खोलते हैं: खाता उनके नाम पर है, उसमें रखे शेयर के मालिक वे हैं, और manager जो भी बिक्री करता है, उसका मुनाफ़ा या नुकसान उनका है।
उनकी कज़िन दिव्या ₹1 करोड़ एक Category II AIF में लगाती हैं, जो उन्हें placement memorandum के ज़रिए पेश किया गया। उनके पास एक privately placed pooled फंड की यूनिट हैं। उस फंड की income पर, business income को छोड़कर, टैक्स उन्हीं पर लगता है, जैसे उन्होंने वह निवेश सीधे किया हो। तीनों पर बाज़ार के जोखिम का असर पड़ता है, और किसी को भी रिटर्न की गारंटी नहीं दी गई है।
मुख्य बातें
- Mutual fund स्कीम और SIF pooled होते हैं, और निवेशकों के पास यूनिट होती हैं; SIF mutual fund framework के भीतर आता है।
- PMS client के अपने नाम पर एक अलग खाता है, और securities का मालिक client होता है।
- AIF एक privately placed pooled फंड है, जो Category I, II या III में होता है।
- कम से कम रकम: SIF में हर निवेशक के लिए ₹10 लाख, PMS में हर client के लिए ₹50 लाख, AIF में हर निवेशक के लिए ₹1 करोड़; accredited investors को तीनों से छूट है।
- PMS client पर खाते के हर लेन-देन पर टैक्स लगता है; Category I और II AIFs business income के अलावा बाकी income निवेशकों को pass through करते हैं; Category III AIFs पर टैक्स फंड के स्तर पर लगता है।
आम ग़लतफ़हमियाँ
- SIF mutual fund के नियमों से बाहर का प्रोडक्ट नहीं है। यह mutual fund framework के भीतर आता है और निवेशकों के पास यूनिट होती हैं।
- AIF की कम से कम रकम ₹5 करोड़ नहीं है। सामान्य कम से कम रकम हर निवेशक के लिए ₹1 करोड़ है।
- Pass-through हर AIF पर या हर तरह की income पर लागू नहीं होता। Category III की income पर, और Category I और II फंड की business income पर, टैक्स फंड के स्तर पर लगता है।
लोग अक्सर पूछते हैं
चारों में से कौन-से pooled हैं?
Mutual fund स्कीम, SIFs और AIFs pooled हैं, और निवेशकों के पास यूनिट होती हैं। PMS pooled नहीं है: हर client का एक अलग खाता होता है।
कम से कम रकम से किसे छूट है?
Accredited investors को SIF, PMS और AIF की कम से कम रकम से छूट है। AIF में, AIF के या उसके manager के कर्मचारियों और directors के लिए कम से कम रकम कम है: ₹25 लाख।
क्या SIF पर AIF की तरह टैक्स लगता है?
नहीं। SIF एक mutual fund प्रोडक्ट है, pass-through vehicle नहीं।
यह लेसन किन स्रोतों पर आधारित है
- SEBI (Portfolio Managers) Regulations, 2020 (3 सितंबर 2025 तक के बदलावों के साथ)
- SEBI (Alternative Investment Funds) Regulations, 2012 (14 जुलाई 2026 तक के बदलावों के साथ)
- SEBI (Mutual Funds) Regulations, 2026 और SEBI Master Circular for Mutual Funds, 20 मार्च 2026, Chapter 21 (Specialized Investment Funds)
- Income-tax Act, 2025 (capital gains पर और Alternative Investment Fund की income पर टैक्स)
इस लेसन के अंग्रेज़ी मूल को इन स्रोतों से मिलाकर स्वतंत्र रूप से जाँचा गया है (8 अक्टूबर 2026)। यह उसी का हिन्दी अनुवाद है, जिसे अंग्रेज़ी से मिलाकर अलग से जाँचा गया है। नियम बदलते रहते हैं: किसी भी आँकड़े पर भरोसा करने से पहले मौजूदा regulation, scheme document या policy wording देख लें। यह सिर्फ़ शिक्षा है, सलाह नहीं।

